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आज कल सारी दुनिया इतनी मशरूफ है की कृष्ण की प्यारी गाय बेचारी की किसी को चिंता ही नहीं। वैसे तो जिधर देखो उधर वन्य जीवों पर चर्चा हो रही है व उन्हें बचने के लिए क्या क्या जतन और प्रयत्न किये जा रहे हैं और अगर गायें अगर हमारे रास्ते में आ जाती है तो हम कहते आवारा पशु सड़क पर तांडव करते हैं। तो हम उन्हें आवारा पशुओं का नाम दे देते हैं और प्रशाशन को कहते हैं की प्रशाशन इस बारे मैं कोई कदम नहीं उठा रहा है। इक तरफ हम गाय को
माता का दर्जा देते हैं और दूसरी तरफ आवारा पशु। गौओं की भारत में हालत क्या हो रही है इस बारे में कोई नहीं कहता है गौएँ बिचारी गू खाकर गुजारा कर हरी हैं उन्हें कोई चारा देकर भी खुश नहीं है हैं इतना जरूर है है की कभी जभी यदा कदा किसी त्यौहार पर हम गुड या एक रोटी खिला कर खुश हो लेते हैं और भगवन और गौओं पर एहसान कर देते हैं। क्या कभी इनपर हम कभी गहन विचार करेंगे ? क्या वाकई गौ को गौ माता का दर्जा हम दे पाएंगे ?

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